धमतरी। छत्तीसगढ़ के विधि जगत के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। छत्तीसगढ़ राज्य विधिज्ञ परिषद के सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता शत्रुहन सिंह साहू को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI), नई दिल्ली द्वारा अनुशासन समिति (Disciplinary Committee) में Co-opted Member के रूप में मनोनीत किया गया है। उनके मनोनयन से धमतरी जिले के साथ ही प्रदेशभर के अधिवक्ताओं में हर्ष और प्रसन्नता का माहौल है।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा 17 अगस्त 2026 को जारी पत्र के अनुसार यह मनोनयन अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 9(1) के तहत किया गया है। विधि व्यवसाय में उनके अनुभव, ज्ञान और प्रतिष्ठा को ध्यान में रखते हुए उन्हें अनुशासन समिति के कार्यों में सहयोग एवं मार्गदर्शन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अनुशासनात्मक मामलों के निराकरण में निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका
Co-opted Member के रूप में अधिवक्ता शत्रुहन सिंह साहू अनुशासन समिति की बैठकों में शामिल होकर समिति के समक्ष प्रस्तुत अनुशासनात्मक प्रकरणों के विचार एवं निराकरण की प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभाएंगे। वे अधिवक्ता अधिनियम, 1961 तथा बार काउंसिल ऑफ इंडिया के लागू नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप समिति के कार्यों में सहयोग करेंगे।
यह जिम्मेदारी विधि क्षेत्र में उनके अनुभव और सक्रिय योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण मान्यता के रूप में देखी जा रही है। उनके मनोनयन को धमतरी के अधिवक्ता समुदाय के लिए भी गौरव का विषय माना जा रहा है।
निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ दायित्व निभाने का संकल्प
अधिवक्ता शत्रुहन सिंह साहू ने इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया एवं विशेष रूप से छत्तीसगढ़ राज्य विधिज्ञ परिषद के सदस्य तथा बार काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि शैलेन्द्र दुबे के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्हें सौंपे गए दायित्व का निर्वहन पूर्ण निष्ठा, निष्पक्षता, पारदर्शिता और विधिक गरिमा के साथ करने का हरसंभव प्रयास करेंगे।
उन्होंने साथी अधिवक्ताओं, शुभचिंतकों एवं सहयोगियों के प्रति भी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के निर्वहन में उनका सहयोग और मार्गदर्शन सदैव अपेक्षित रहेगा।
अधिवक्ता शत्रुहन सिंह साहू वर्तमान में अध्यक्ष, अधिवक्ता कल्याण वित्त समिति तथा सदस्य, छत्तीसगढ़ राज्य विधिज्ञ परिषद के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। बीसीआई की अनुशासन समिति में उनका मनोनयन उनके विधिक अनुभव और कार्यक्षमता को मिली महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी माना जा रहा है।
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