धमतरी-
आत्मनिर्भरता दलहन मिशन के तहत केन्द्रीय दल ने  धमतरी जिले का दौरा कर चना फसल केक्लस्टर प्रदर्शन, बीज उत्पादन कार्यक्रम और फसल कटाई प्रयोगों का निरीक्षण किया। इस दौरान दल ने विभिन्न ग्रामों में पहुंचकर योजनाओं के क्रियान्वयन और किसानों की भागीदारी का जायजा लिया।भ्रमण की शुरुआत विकासखण्ड कुरूद के ग्राम मौरीखुर्द से हुई, जहां 50 हेक्टेयर क्षेत्र में लगाए गए चना के क्लस्टर प्रदर्शन का निरीक्षण किया गया। दल ने किसानों से संवाद कर उन्हें उपलब्ध कराई गई सामग्री, बुआई तकनीक एवं फसल प्रबंधन की जानकारी ली। साथ ही, क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा संधारित अभिलेखों का परीक्षण कर योजनाओं की प्रगति का मूल्यांकन किया। इसके पश्चात ग्राम भरदा में चना बीज उत्पादन कार्यक्रम का अवलोकन किया गया। यहां कृषक लेखराज चन्द्राकर एवं बीज प्रबंधक आर.ए. दोहरे द्वारा बीज उत्पादन की प्रक्रिया और प्रबंधन संबंधी जानकारी प्रस्तुत की गई। विकासखण्ड धमतरी के ग्राम बोडरा में 60 हेक्टेयर क्षेत्र में उगाई गई चना की किस्म RVG-202 पर 5×5 पद्धति से फसल कटाई प्रयोग किया गया। तुलनात्मक अध्ययन के लिए कंट्रोल प्लॉट में भी समानांतर प्रयोग किया गया, जिससे उत्पादन क्षमता का वैज्ञानिक आकलन किया जा सके।भ्रमण के दौरान केन्द्रीय दल ने उप संचालक कृषि के माध्यम से कलेक्टर धमतरी से मुलाकात कर जिले में दलहन फसलों के विस्तार पर चर्चा की। इस अवसर पर उड़द एवं मूंग फसल के प्रदर्शन कार्यक्रमों की जानकारी भी साझा की गई।जिले में फसल चक्र को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। पिछले तीन वर्षों में दलहन क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2023-24 में चना का रकबा 6675 हेक्टेयर था, जो बढ़कर वर्ष 2025-26 में 18210 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। किसानों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है। पूर्व में 8 समितियों के जरिए 2212 कृषकों का 1376.73 हेक्टेयर क्षेत्र में पंजीयन किया गया था, जिसमें 20646.50 क्विंटल चना की खरीदी हुई। वहीं वर्तमान रबी वर्ष 2025-26 में 11 समितियों के माध्यम से 4925 कृषकों का 5949.31 हेक्टेयर क्षेत्र में पंजीयन किया गया है।