धमतरी-
भारत-अमेरिका प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के विरोध में सोमवार को जिला किसान यूनियन धमतरी के प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर धमतरी को ज्ञापन सौंपा। किसानों ने मांग की कि इस समझौते में हस्ताक्षर नहीं किए जाएं और इसे तत्काल रद्द किया जाए, क्योंकि यह भारतीय किसानों और कृषि व्यवस्था के हितों के विपरीत बताया जा रहा है।किसान नेताओं ने ज्ञापन में कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते से देश के किसानों के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। उनका कहना है कि इस समझौते के तहत भारत में अमेरिकी कृषि उत्पादों पर वर्तमान में लगने वाले 30 से 150 प्रतिशत तक के आयात शुल्क को शून्य करने पर सहमति दी जा रही है, जबकि अमेरिका भारतीय उत्पादों पर लगभग 18 प्रतिशत शुल्क लगाएगा। किसानों के अनुसार यह पहले के औसत से कई गुना अधिक है और इससे भारतीय कृषि उत्पादों की प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ सकती है।ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि अमेरिका में लगभग 18.65 लाख किसान हैं, जबकि भारत में किसान परिवारों की संख्या करीब 11.10 करोड़ है। अमेरिका में किसानों को भारी सब्सिडी और उन्नत तकनीक का लाभ मिलता है, जिससे वे कम लागत में उत्पादन कर पाते हैं। वहीं भारत में किसानों को सीमित सहायता मिलती है, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में कठिनाई महसूस करेंगे।किसानों का कहना है कि यदि विदेशी कृषि उत्पादों का शुल्क मुक्त आयात शुरू हुआ तो धान, मक्का, गेहूं, कपास, गन्ना, फल और सब्जियों जैसी देशी फसलों की कीमतों में गिरावट आ सकती है, जिससे किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और कृषि क्षेत्र संकट में आ सकता है।राष्ट्रीय संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर 9 मार्च 2026 को जिला किसान यूनियन धमतरी के प्रतिनिधिमंडल ने यह ज्ञापन जिला कलेक्टर के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को प्रेषित किया। किसानों ने केंद्र सरकार से इस प्रस्तावित समझौते पर पुनर्विचार करते हुए इसे रद्द करने की मांग की है।इस अवसर पर किसान प्रतिनिधि घना राम साहू सहित अन्य किसान उपस्थित रहे।