धमतरी/मगरलोड -
शिक्षा से वंचित रह गई महिलाओं और बालिकाओं को फिर से पढ़ाई से जोड़ने के उद्देश्य से प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन द्वारा संचालित सेकंड चांस प्रोग्राम जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सशक्त बदलाव का माध्यम बन रहा है। इस पहल के तहत 14 से 60 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं को उनके घर के समीप ही शिक्षा प्राप्त करने का अवसर दिया जा रहा है, जिससे वे अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी कर आत्मनिर्भर बन सकें।
कार्यक्रम के अंतर्गत वर्तमान में 16 शिक्षा केंद्र संचालित हैं, जहां चार फैकल्टी सदस्य माधुरी मानिकपुरी, अमरवती सिन्हा, परमेश्वरी साहू और अश्विनी सूर्य  विभिन्न गांवों में नियमित रूप से अध्ययन कार्य करा रहे हैं। टीम का नेतृत्व अर्चना जोशी कर रही हैं। प्रत्येक फैकल्टी सदस्य चार गांवों में पढ़ा रहे हैं तथा प्रतिदिन दो गांवों में कक्षाएं संचालित की जाती हैं।
 एक क्लस्टर में औसतन 10 से 15 शिक्षार्थी अध्ययनरत हैं।पिछले वर्ष कार्यक्रम के तहत 139 शिक्षार्थियों ने परीक्षा दी थी, जबकि इस वर्ष 169 महिलाएं इससे जुड़ चुकी हैं, जिनमें अधिकांश की आयु 30 से 60 वर्ष के बीच है। शिक्षार्थियों को हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और समाज विज्ञान सहित प्रमुख विषयों की तैयारी कराई जा रही है।
कार्यक्रम के अंतर्गत पुस्तकें, अध्ययन सामग्री, सुविधाएं तथा परीक्षा शुल्क पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अध्ययन प्रक्रिया को तीन चरणों  जीरो सेशन, फाउंडेशन कोर्स और मेन कोर्स  में विभाजित किया गया है। जीरो सेशन में शिक्षार्थियों के ज्ञान स्तर का आकलन, फाउंडेशन कोर्स में बुनियादी विषयों की समझ और मेन कोर्स में शासकीय ओपन स्कूल के पाठ्यक्रम के अनुरूप तैयारी कराई जाती है।
इसके साथ ही स्वास्थ्य, स्वच्छता, मासिक धर्म जागरूकता, जीवन कौशल और रोजगार संबंधी जानकारी से जुड़ी गतिविधियों का भी आयोजन किया जा रहा है, जिससे महिलाओं का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके। अमरवती सिन्हा द्वारा अमलीडीही एवं कपालफोड़ी क्षेत्रों में तथा माधुरी मानिकपुरी द्वारा परसवानी क्षेत्र में केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।ग्रामीण महिलाओं में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता और आत्मविश्वास इस कार्यक्रम की सफलता का प्रमाण बन रहे हैं, जो उन्हें आत्मनिर्भर जीवन की ओर आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रहे है।