धमतरी जिले में पशुपालन अब कृषि की सहायक गतिविधि भर न रहकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्त आधार बनता जा रहा है। राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) के अंतर्गत पशुपालन को उद्यमिता से जोड़ने के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। बैंकों द्वारा 10 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले 15 प्रकरणों को स्वीकृति प्रदान की गई है, जिससे धमतरी जिला प्रदेश में अग्रणी जिलों में शामिल हो गया है।जिले में राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत उद्यमिता विकास कार्यक्रम (ईडीपी) के तहत बैकयार्ड पोल्ट्री एवं हैचरी, भेड़-बकरी पालन तथा पिगरी (सूकर पालन) जैसे क्षेत्रों में कुल 37 ऑनलाइन प्रकरण प्राप्त हुए। इनमें से 28 प्रकरण स्वीकृत किए जा चुके हैं। भेड़-बकरी पालन से जुड़े 28 प्रकरणों में से 15 प्रकरणों को बैंकों द्वारा ऋण स्वीकृति दी गई है, जबकि शेष प्रकरण विभिन्न स्तरों पर प्रक्रियाधीन हैं।स्वीकृत प्रकरणों की कुल अनुमानित लागत लगभग 10 करोड़ रुपये से अधिक है, जो यह दर्शाती है कि पशुपालन अब छोटे स्तर की गतिविधि न रहकर संगठित ग्रामीण उद्यम के रूप में विकसित हो रहा है। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि गांवों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।किसानों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना का भी प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। जिले में 1700 केसीसी आवेदन तैयार किए गए, जिनमें से 180 किसानों को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इससे किसानों को कृषि एवं पशुपालन संबंधी आवश्यकताओं के लिए समय पर ऋण उपलब्ध हो रहा है।
कलेक्टर अबिनास मिश्रा ने बताया कि जिले में पशुपालन को पारंपरिक गतिविधि के बजाय रोजगार एवं उद्यमिता से जोड़ने का सुनियोजित प्रयास किया गया है। राष्ट्रीय पशुधन मिशन सहित अन्य योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और बैंक ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।उन्होंने कहा कि बैंकों द्वारा 10 करोड़ रुपये से अधिक के 15 प्रकरणों की स्वीकृति यह दर्शाती है कि किसान अब पशुपालन को व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं। पशुपालन के साथ केसीसी योजना को प्राथमिकता देकर किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आय में स्थायी वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है।
कलेक्टर ने यह भी बताया कि महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाकर गांवों में ही रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण पलायन पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में धमतरी जिला पशुपालन के क्षेत्र में प्रदेश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित होगा।
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