डांगीमांचा और खिड़कीटोला में 35 एकड़ में रागी उत्पादन, आत्मा योजना से बदली खेती की तस्वीर
धमतरी-
धमतरी जिले के आदिवासी बहुल एवं वनांचल क्षेत्र में लगभग 50 वर्षों के अंतराल के बाद रबी सीजन में खेती की संगठित शुरुआत हुई है। कृषि विभाग द्वारा संचालित कृषि सुधार एवं विस्तार कार्यक्रम आत्मा योजना के अंतर्गत विकासखंड धमतरी के ग्राम डांगीमांचा एवं खिड़कीटोला में कृषकों द्वारा लगभग 35 एकड़ क्षेत्र में लघु धान्य फसल रागी मिलेट की खेती की जा रही है।गंगरेल बांध के उच्चहन क्षेत्र में स्थित यह वनाच्छादित क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से विशेष परिस्थितियों वाला है। अधिक ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां लंबे समय से रबी सीजन में खेती संभव नहीं हो पा रही थी, किंतु आत्मा योजना के माध्यम से तकनीकी सहयोग एवं मार्गदर्शन मिलने से क्षेत्र में रागी उत्पादन की नई पहल साकार हुई है।कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने बताया कि जिले के वनांचल एवं आदिवासी क्षेत्रों में लघु धान्य फसलों को बढ़ावा देना शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि गंगरेल उच्चहन क्षेत्र में लगभग 50 वर्षों बाद रबी सीजन में रागी की खेती की शुरुआत एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। आत्मा योजना के तहत कृषकों को आधुनिक तकनीक, पद्धति एवं बीज उत्पादन की जानकारी देकर उनकी आय बढ़ाने के साथ-साथ पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। भविष्य में मिलेट आधारित खेती को और अधिक विस्तार देते हुए कृषकों को बाजार से जोड़ने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
विगत सप्ताह जिले में आयोजित मिलेट महोत्सव के पश्चात 10 जनवरी 2026 को आत्मा एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ग्राम स्तर पर कृषक पाठशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ग्राम पंचायत तुमराबहार के सरपंच दीपक राम ध्रुव, डीपीडी आत्मा फत्ते लाल पटेल, आरएईओ बी. एस. मंडावी, बीटीएम खिलेश कुमार साहू, एटीएम छगन साहू सहित बड़ी संख्या में कृषक उपस्थित रहे। पाठशाला में 40 महिला कृषक एवं 32 पुरुष कृषकों की सहभागिता रही।
कृषक पाठशाला में रागी फसल की SMI पद्धति से उन्नत खेती, बीज उत्पादन, फसल प्रबंधन, पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा उत्पादन लागत घटाकर अधिक लाभ अर्जित करने की तकनीकों की विस्तृत एवं व्यवहारिक जानकारी दी गई। इसके साथ ही रागी के पोषण मूल्य, स्वास्थ्य लाभ एवं बाजार संभावनाओं पर भी कृषकों को अवगत कराया गया।कार्यक्रम के दौरान कृषकों को मिलेट आधारित आजीविका सुदृढ़ीकरण, जलवायु अनुकूल खेती तथा शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेकर आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया। उपस्थित कृषकों ने क्षेत्र में रागी की खेती के इस सफल प्रयोग को भविष्य में और अधिक विस्तार देने पर सहमति व्यक्त की।
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