धमतरी।
खरीफ विपणन वर्ष 2025–26 के तहत समर्थन मूल्य पर धान खरीदी तो लगातार जारी है, लेकिन शाखा–दरबा अंतर्गत संचालित उपार्जन केंद्रों में धान उठाव की रफ्तार अपेक्षा से धीमी बनी हुई है। इससे कई केंद्रों में बफर लिमिट से अधिक धान का भंडारण पहुंच गया है, जिससे खरीदी व्यवस्था पर दबाव बढ़ने लगा है।उपलब्ध जानकारी के अनुसार शाखा दरबा अंतर्गत मडेली, कचना, जामगांव, दरबा, करगा एवं चटौद उपार्जन केंद्रों में अब तक कुल 18,7599.60 क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी है,जिसमें केवल 28430.00क्विंटल का उठाव हुआ है जबकि इसके मुकाबले केवल खरीदी केन्द्रों में1.59169.60 क्विंटल धान परिवहन शेष बचा हुआ है जबकि शाखा अंतर्गत आने वाले खरीदी केन्द्रों का कुल सफर लिमिट है यानी सफर लिमिट से करीब दो-तीन गुना धान अब भी केंद्रों में जाम है।केंद्रवार स्थिति पर नजर डालें तो—मडेली केंद्र में 37,164 क्विंटल की खरीदी के मुकाबले 2590.क्विंटल का ही परिवहन हुआ है।कचना में 26,316 क्विंटल की खरीदी के विरुद्ध 5260.क्विंटल उठाव दर्ज किया गया है।जामगांव में खरीदी 38,702 क्विंटल रही, जबकि उठाव 8890 क्विंटल तक सीमित है।दरबा केंद्र में 35,190 क्विंटल खरीदी के सामने 4890 क्विंटल ही परिवहन हो सका।चटौद एवं करगा जैसे केंद्रों में भी खरीदी के अनुपात में उठाव कम बना हुआ है।आंकड़ों के अनुसार शाखा दरबा की कुल बफर लिमिट 45,000 क्विंटल निर्धारित है, जिसके मुकाबले केंद्रों में 159169.60 क्विंटल धान का भौतिक भंडारण दर्ज किया गया है। लगातार खरीदी जारी रहने की स्थिति में यदि उठाव में तेजी नहीं लाई गई, तो आने वाले दिनों में भंडारण क्षमता एक बड़ी चुनौती बन सकती है।धान उठाव की धीमी गति का सीधा असर मिलिंग कार्य पर भी पड़ रहा है। हालांकि कुछ राइस मिलों द्वारा उठाव किया गया है, लेकिन अनुबंधित मात्रा की तुलना में उठाव अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है।सूत्रों के अनुसार सीमित डीओ कटनेऔर मिलों द्वारा सीमित उठाव के कारण यह स्थिति बनी हुई है। केंद्र प्रभारियों का कहना है कि यदि शीघ्र उठाव नहीं बढ़ाया गया, तो खरीदी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। फिलहाल किसानों से खरीदी जारी है, लेकिन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए धान उठाव में तेजी लाना अत्यंत आवश्यक हो गया है।