धमतरी
 छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के अंतर्गत आने वाले विकास खंड नगरी में कृषि विभाग के एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी द्वारा अपने अधिकारों की सीमाएं लांघकर अवैध गतिविधियों को अंजाम देने का एक गंभीर मामला सामने आया है। विकास खंड नगरी में वर्तमान में प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी (SADO) के रूप में कार्यरत ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (ग्राम सेवक) पर अपने पद और प्रभार का दुरुपयोग करने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले को लेकर क्षेत्र के एक जागरूक नागरिक ने सीधे सूबे के मुखिया के जनशिकायत निवारण तंत्र यानी मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत में प्रभारी अधिकारी के खिलाफ वैधानिक नियमों के उल्लंघन और व्यापारियों के उत्पीड़न की बात कहते हुए तत्काल उच्च स्तरीय जांच और कड़ी अनुशासनात्मक कार्यवाही की मांग की गई है, जिससे प्रशासनिक अमले सहित स्थानीय स्तर पर हड़कंप मच गया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, भारत सरकार द्वारा अधिसूचित 'उर्वरक गुण नियंत्रण आदेश 1985' (फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर) के तहत ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी या प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी स्तर के किसी भी शासकीय सेवक को निजी अथवा सहकारी उर्वरक विक्रय परिसरों के भौतिक सत्यापन, आकस्मिक निरीक्षण करने अथवा खाद के नमूने (सैंपल) लेने का कोई भी कानूनी या वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है। नियमानुसार यह संपूर्ण कार्यक्षेत्र केवल और केवल अधिकृत उर्वरक निरीक्षक (फर्टिलाइजर इंस्पेक्टर) के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आता है। इसके बावजूद, क्षेत्र में मूल उर्वरक निरीक्षक की उपस्थिति का बेजा फायदा उठाते हुए प्रभारी एसएडीओ 
 द्वारा लगातार विभिन्न निजी दुकानों और सहकारी समितियों के परिसरों में जाकर जबरन भौतिक सत्यापन और औचक निरीक्षण की कार्यवाहियां की जा रही हैं, जो सीधे तौर पर केंद्र और राज्य शासन के नियमों की खुली अवहेलना है।
मामला सिर्फ अधिकार क्षेत्र के उल्लंघन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि शिकायत में इस अवैध निरीक्षण की आड़ में बड़े पैमाने पर कथित भ्रष्टाचार और अवैध वसूली किए जाने के भी संगीन आरोप लगाए गए हैं। बताया जा रहा है कि आधिकारिक रूप से अधिकार न होने के बाद भी दुकानों और सोसायटियों में धमक जमाकर स्थानीय छोटे-बड़े खाद व्यापारियों और सहकारी समिति के प्रबंधकों को नियमों का खौफ दिखाया जाता है। इसके बाद मामले को रफा-दफा करने या कार्यवाही का डर दिखाकर मोटी रकम की मांग की जाती है। विभागीय संरक्षण और पद के प्रभाव के चलते लंबे समय से चल रहे इस कथित खेल की वजह से अब नगरी क्षेत्र के खाद व्यापारियों, व्यवसायियों और समिति संचालकों में भारी आक्रोश और असंतोष की स्थिति निर्मित हो गई है। व्यापारियों का कहना है कि एक तरफ वे शासन के नियमों के तहत पूरी ईमानदारी से व्यवसाय संचालित कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ गैर-अधिकृत अधिकारियों द्वारा इस तरह का मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न व्यापार को प्रभावित कर रहा है।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है, क्योंकि जागरूक नागरिक द्वारा सीधे शासन के सर्वोच्च स्तर पर इसकी शिकायत कर यह स्पष्ट कर दिया गया है कि स्थानीय स्तर पर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। शिकायत में मांग की गई है कि जिला प्रशासन और कृषि विभाग के उच्चाधिकारी इस मामले को गंभीरता से लें और तत्काल एक निष्पक्ष जांच टीम गठित कर मौके की हकीकत खंगालें। साथ ही, नियमों के विरुद्ध जाकर किए गए सभी निरीक्षणों की वैधता की जांच हो और दोषी अधिकारी के खिलाफ तत्काल प्रभाव से निलंबन जैसी सख्त दंडात्मक व अनुशासनात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन को भेजी गई इस शिकायत के बाद धमतरी जिला प्रशासन और कृषि विभाग के आला अफसर इस मामले में कितनी मुस्तैदी दिखाते हैं और क्षेत्र के आक्रोशित व्यापारियों को कब तक न्याय मिल पाता है।