छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा संचालित धान खरीदी व्यवस्था इस वर्ष शुरुआत से ही भारी अव्यवस्था का शिकार बनी हुई है। किसानों को अपनी उपज बेचने में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि शासन–प्रशासन की ओर से समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए अब तक कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है।छत्तीसगढ़ किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष घनाराम साहू ने बताया कि कभी टोकन जारी नहीं होते, कभी खरीदी सीमा घटा दी जाती है, तो कभी खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था हावी रहती है। इन कारणों से किसान महीनों से भटकने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि स्थिति यह है कि धान खरीदी सत्र समाप्त होने में अब मात्र लगभग 15 दिन शेष रह गए हैं, जबकि अब तक लगभग 50 प्रतिशत ही खरीदी हो पाई है, जो किसानों के साथ सीधा अन्याय है।घनाराम साहू ने बताया कि धान खरीदी प्रक्रिया को सरल बनाने के बजाय शासन के दिशा-निर्देश किसानों की ईमानदारी और निष्ठा पर प्रश्नचिह्न लगाते प्रतीत होते हैं। खेतों में दिन-रात मेहनत कर धान उपजाने वाला किसान आज अपने ही धान को बेचने के लिए दर-दर भटक रहा है, जो अत्यंत चिंताजनक स्थिति है।इस गंभीर परिस्थिति को देखते हुए भारतीय किसान संघ एवं छत्तीसगढ़ किसान यूनियन ने संयुक्त रूप से 16 जनवरी को जिला मुख्यालय में आंदोलन कर कलेक्टर के माध्यम से शासन को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है। घनाराम साहू ने जिले के समस्त किसान भाइयों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट होने की अपील की है।उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते धान खरीदी व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो किसान संगठनों द्वारा आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
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